समाज तो
एक सोच है
ख्याल है
वजह नहीं,
कोई वजूद नहीं है.
कुछ कहता है
कुछ देखता है
बनाता है
बिगाड़ता है,
टोकता है
रोकने को
हर मोड पे
खड़ा मिलता है,
पर भटको
कहीं गिर पडो
तो कहीं आस पास
कहीं मौजूद नहीं है.
जा रहें हैं सब
किसी ओर
बस भीड़ बने हैं
जी रहें हैं सब
समय खींच रहें हैं,
खो न जाना तुम कहीं
सो न जाना तुम कभी,
एक चमक जो तुम्हारे
आँखों में चमकती है
किसी मौके का है
किसी मकसद का है
और वो
कोई फिजूल नहीं है.
एक सोच है
ख्याल है
वजह नहीं,
कोई वजूद नहीं है.
कुछ कहता है
कुछ देखता है
बनाता है
बिगाड़ता है,
टोकता है
रोकने को
हर मोड पे
खड़ा मिलता है,
पर भटको
कहीं गिर पडो
तो कहीं आस पास
कहीं मौजूद नहीं है.
जा रहें हैं सब
किसी ओर
बस भीड़ बने हैं
जी रहें हैं सब
समय खींच रहें हैं,
खो न जाना तुम कहीं
सो न जाना तुम कभी,
एक चमक जो तुम्हारे
आँखों में चमकती है
किसी मौके का है
किसी मकसद का है
और वो
कोई फिजूल नहीं है.
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