अपने पैरों को
समेट भी न सका
हटा भी न सका
रोक भी नहीं सका
न चाह कर भी
बचा न पाया
दबने से
उस मकड़ी को
जो मेरे रस्ते में
आ गयी थी
आज..
मुझे मालूम है
समय
तुम भी कभी
ऐसा ही करोगे
मेरे साथ भी
और
मैं भी
कुछ न कहूँगा
उस दिन
ठीक उसी
मकड़ी की तरह
जो आज
कुचल गयी
मरे पैरों तले .
समेट भी न सका
हटा भी न सका
रोक भी नहीं सका
न चाह कर भी
बचा न पाया
दबने से
उस मकड़ी को
जो मेरे रस्ते में
आ गयी थी
आज..
मुझे मालूम है
समय
तुम भी कभी
ऐसा ही करोगे
मेरे साथ भी
और
मैं भी
कुछ न कहूँगा
उस दिन
ठीक उसी
मकड़ी की तरह
जो आज
कुचल गयी
मरे पैरों तले .
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