प्यार
ही तो था
जो छलका था,
थोड़ा मचला था
थोड़ा शरमाया था
और..
न चाह कर भी जो,
मेरे पास आया था.
कभी आँखों के कोरों से
तो कभी शीशे के छोरों से
कभी दूसरे के बहाने
कभी अपने ही
किये को छुपाने
पड़ता जो
मेरे नजरों पर
अकस्मात
और..
मैं बचता तो,
देख मुस्कुराया था.
क्या कहें जब
हर बात
पीछे छूटता था
क्या करें
जब होश ही
हवा होता था
कहाँ जाएँ
कि जब वक्त ही
रुकता था
प्यार ही तो था
जो कुछ
अजीज
ले गया तो
कुछ..
बेशकीमती
दे भी गया था.
ही तो था
जो छलका था,
थोड़ा मचला था
थोड़ा शरमाया था
और..
न चाह कर भी जो,
मेरे पास आया था.
कभी आँखों के कोरों से
तो कभी शीशे के छोरों से
कभी दूसरे के बहाने
कभी अपने ही
किये को छुपाने
पड़ता जो
मेरे नजरों पर
अकस्मात
और..
मैं बचता तो,
देख मुस्कुराया था.
क्या कहें जब
हर बात
पीछे छूटता था
क्या करें
जब होश ही
हवा होता था
कहाँ जाएँ
कि जब वक्त ही
रुकता था
प्यार ही तो था
जो कुछ
अजीज
ले गया तो
कुछ..
बेशकीमती
दे भी गया था.
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