दिल भी है
दिल की बातें भी हैं,
पर दिल से
दिल की बात भी
दिल की बात भी
कोई
बताता ही नहीं.
बताता ही नहीं.
कई आते हैं
कई जाते हैं मगर,
अब तंग गली कहके भी
कोई
टकराता ही नहीं.
टकराता ही नहीं.
उम्र की फसल
सबने काटी है
मगर,
मगर,
दिन ढले
खाने पे कभी
खाने पे कभी
कोई बुलाता ही नहीं.
मौका भी है
मौजूद भी है मगर,
मेरा माशूक
अब
अब
मेरा मन
बहलाता ही नहीं.
बहलाता ही नहीं.
वक्त हमें सब सिखा देता है
सच ही है,
जिंदगी का सबक लेने
कोई
मदरसे जाता भी नहीं.
मदरसे जाता भी नहीं.
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