थोड़ी सी घुटन भी ठीक है
कि कुछ कम है
कुछ रुक सा गया है
फिर से कोई
नयी साँस तो लेता है .
थोड़ी सी चुभन भी ठीक है
जब रिसता है
खुद का खून
दूसरों का तब
दर्द याद आता है .
थोड़ी सी जलन भी ठीक है
देह भी है
खाल भी है
खोल ही है !
पता चलता है .
थोड़ी सी तड़प भी ठीक है
कभी मिले
यूँ ही खो भी गए
और ना मिले
तब उनका मोल लगता है .
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