मुददतों बाद वो मिलता है
कहता है मेरे बादे-सहर तुम हो
बारहा होता वो आस पास ही है
दिल के सुकूं को बस
इतना ही काफ़ी होता है.
मेरे ताल्लुक हैं की नहीं
उससे, उसके हकीकत से
बस उसका खैर करना,
उसका रुजआन
मेरे अहसासों की तालीम को
इतना ही काफ़ी होता है.
दिल में जो जगह है,पीराना है
उसके होने से पाक हुआ है
सेहरा से अब गुलशन बना है
जिन्दगी को जश्न करने को
इतना ही काफ़ी होता है
कहता है मेरे बादे-सहर तुम हो
बारहा होता वो आस पास ही है
दिल के सुकूं को बस
इतना ही काफ़ी होता है.
मेरे ताल्लुक हैं की नहीं
उससे, उसके हकीकत से
बस उसका खैर करना,
उसका रुजआन
मेरे अहसासों की तालीम को
इतना ही काफ़ी होता है.
दिल में जो जगह है,पीराना है
उसके होने से पाक हुआ है
सेहरा से अब गुलशन बना है
जिन्दगी को जश्न करने को
इतना ही काफ़ी होता है
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