Friday, August 20, 2010

lovers

एक तारा टूटा, कहीं गिरा
एक तारा टूटा, कहीं और गिरा.
वे दो प्रेमी आज भी
एक दूसरे को ढूंढ़ते हैं.

एक खेतों में काम करती है
तो दूजा टीले पर भेंड़ चराता है
बात नहीं करते, एक दूसरे को
बस घंटों देखते हैं.

एक पनघट पे पानी भरती है
तो दूजा परदेशी, प्यासा आता है
आंख भर मिलती है मगर
जिंदगी भर का वादा करते हैं.

एक पहाड़ों पर बांसुरी बजाता है
तो दूजा बन में नाच उठती है
एक दूजे के लिए  ही जीते हैं दोनों
एक दूजे पर ही मरते हैं.

एक हीर है तो, उसका राँझा उसे खोजता फिरता है
अपने शीरीं के आने की, फरियाद बाट जोहता है
दिन बदला है,  दुनिया भी अब दूसरी है 
दो दिल मगर आज भी वैसे ही मिलते हैं.

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