Sunday, July 11, 2010

once again

फिर हवा बोली है
रुत गुनगुनाया है
और दिल मचला है
थिरकने के लिए

फिर चाँद बादलों से
निकल आया है
और चकोर जा बैठा है
रात भर जगने के लिए

फिर एक फूल छिटक कर
नदी में जा गिरा है
किसी के घने बालों में
जा सजने  के लिए

फिर किसी ने उसे देखा है
और मुस्कुराया है
एक और नया प्यार..
पलकों में पलने के लिए

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