Sunday, May 23, 2010

droplets

कोई एक मिलता है
फिर दूसरा मिलता है
उसके कहने पे
फिर तीसरा मिलता है
ऐसे ही
कहा-सुनी से
दो दोस्त बनते हैं

कुछ सोचें तो
हमें अच्छा लगता है
कुछ कहें तो
उन्हें भी अच्छा लगता है
ऐसे ही
कुछ मिल के करें
तो मुकाम मिलतें है

थोड़ी सी करो तो
उम्मीद होती है
थोडा और करो तो
सब्र होता है
ऐसे ही
कुछ ज्यादा की करो
तो ख्वाब बनते हैं

एक दिन में
तो मिट्टी होता है
दो दिन में
कुछ ईंट सी बनती है
ऐसे ही
दिनोदिन करके
कहीं ताज बनते हैं


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